काठमाडौं। आर्थिक गतिविधि सुस्त हुँदा वाणिज्य बैंकहरुले भने २९.४६ प्रतिशतले नाफा बढाएका छन्। वाणिज्य बैंकहरुले गत आर्थिक वर्ष २०८२/८३ मा ६९ अर्ब ७८ करोड रुपैयाँ नाफा कमाएका हुन्।
नाफा बढ्नुको मुख्य कारण भने कर्जा नोक्सानी (प्रोभिजनिङ) घट्नु नै हो। अघिल्लो वर्ष ५४ अर्ब ९० करोड रहेको कर्जा गत वर्ष घटेर ४७ अर्ब ८५ करोडमा सीमित भएको छ।
एनएमबि बैंकका प्रमुख कार्यकारी अधिकृत (सीइओ) गोविन्द घिमिरे रिकभरी केही सुधार भएको बताउँछन्। ‘समग्रमा बैंकहरुको ऋण असुली मिक्स खालको देखिन्छ। केही बैंकहरुको रिकभरी राम्रो देखिएको छ। केही टपमा छ,’ उनले भने, ‘विगतमा सानो सानो कर्जा असुलीम समस्या देखिएकोमा अहिले त्यसमा त्यस्तो समस्या छैन।’
साथै, गत वर्ष बैंकहरुले ब्याज आम्दानी समेत बढेको छ। वाणिज्य बैंकहरुको ब्याज आम्दानी १ खर्ब ९२ अर्ब २८ रुपैयाँ पुगेको छ। अघिल्लो वर्ष बैंकहरुको ब्याज आम्दानी १ खर्ब ८९ अर्ब ८४ करोड रुपैयाँ थियो।
पछिल्लो त्रैमासमा असुली भएको ऋण अपग्रेड गर्न नमिल्ने भएकाले प्रोभिजन घट्ने र नाफा बढ्ने भएपनि खराब कर्जा सुधार नदेखिएको अर्का एक बैंकका सीइओले बताए।
‘कुनै कर्जा ५० प्रतिशत प्रोभिजिनङ गरेका थियौं। त्यो कर्जा वैशाख-जेठमा असुली भयो। अब प्रोभिजनिङ कम हुन्छ जसले नाफा केही बढ्छ,’ ती सीइओले भने,’ तर, त्यो कर्जा अर्कालाई अपग्रेड अहिले नै गर्न मिल्दैन। जसकारण ऋण असली भए पनि खराब कर्जा कम हुने भएन।’
| वाणिज्य बैंक | २०८२/८३ नाफा रु.(करोडमा) | २०८१/८२ नाफा रु.(करोडमा) | नाफा फरक % | २०८२/८३ ब्याज आम्दानी रु.(करोडमा) | २०८१/८२ब्याज आम्दानी रु.(करोडमा) | २०८२/८३ प्रोभिजनिङ रु.(करोडमा) | २०८१/८२ प्रोभिजनिङ रु.(करोडमा) |
| एनएमबि बैंक | ४०१ | २८५ | ४०.७ | ९४२ | ८०२ | २३४ | १६३ |
| सानिमा बैंक | ३५५ | २५७ | ३८.१३ | ६९९ | ६३५ | १०७ | १८.८९ |
| सिद्धार्थ | ३५१ | ३३६ | ४.४६ | ९०५ | ८४३ | १७६ | १३७ |
| एभरेष्ट | ५०६ | ४८३ | ४.७६ | ९१९ | ९१० | २७ | -१५ |
| नबिल | ७९० | ५९२ | ३३.४५ | १७०० | १६३२ | २६७ | ४२० |
| ग्लोबल | ६२२ | ५०७ | २२.६८ | १६२० | १६६७ | ४७८ | ५९७ |
| कृषि | २६३ | ३७३ | -२९.४९ | ९१२ | ९४४ | ११७२ | ६३ |
| नेपाल एसबिआई | २०४ | १८१ | १२.७१ | ५३३ | ५२६ | ९४ | १०३ |
| कुमारी | ७३८ | १८१ | ३०७.७३ | १२०१ | ११६२ | -१४३ | ३४५ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | ४५५ | २८३ | ६०.७८ | ११९६ | १०१५ | ८४ | २२३ |
| प्रभु | -२४ | ८७ | -१२७.५९ | ९२६ | ७१९ | ४९४ | २४० |
| प्राइम | ४११ | ३२० | २८.४४ | ९२१ | ८९१ | १७३ | २७२ |
| माछापुच्छ्रे | २११ | १८८ | १२.२३ | ६०७ | ५७५ | १०८ | ५५६ |
| हिमालयन | १४८ | १२९ | १४.७३ | ८८१ | १०४५ | २८९ | ३७५ |
| सिटिजन्स | २०९ | १२८ | ६३.२८ | ६२९ | ६४१ | ८२ | २६८ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | २८५ | ३०१ | -५.३२ | ३९४ | ४४६ | -१५ | -३३ |
| एनआइसी एसिया | १८ | -३८७ | ० | ७८४ | १०१३ | २९१ | ९७१ |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट | २७४ | ४३३ | -३६.७२ | १२९८ | १४२० | ६१९ | ४३७ |
| लक्ष्मी सनराइज | ३११ | ४०६ | -२३.४ | ११५८ | १०८५ | ३४९ | १२५ |
| नेपाल बैंक | ४५० | ३०७ | ४६.५८ | १००३ | १०१३ | -१०१ | २२५ |
| जम्मा | ६९७८ | ५३९० | २९.४६ | १९२२८ | १८९८४ | ४७८५ | ५४९०.८९ |
प्रोभिजनिङ घटेको भए पनि खराब कर्जामा वृद्धि भएको छ। पछिल्लो एक वर्षमा बैंकहरुको औसत खराब कर्जा ०.८३ प्रतिशतले वृद्धि भएको छ। राष्ट्र बैंकले दिएको कर्जा पुनर्संरचनाको सुविधा सकिएपछि केही कर्जा माथिल्लो वर्षमा जाँदा त्यसले केही खराब कर्जा बढाएको उनले बताए।
‘राष्ट्र बैंकले दिएका रिस्ट्रक्चरिङ लगायतका सुविधा अवधि सकिसकेको अवस्था हो। हिजो गरेको रिस्ट्रक्चरिङ सुविधा सकिएपछि त्यस्तो कर्जा माथिल्लो वर्गमा जान्छन्। त्यसले केही खराब कर्जा बढाइएको हो,’ उनले भने, ‘पर्याप्त मात्रामा प्रोभिजनिङ हुँदा खराब बढेको धेरै समस्या हुँदैन।
गत आव एभरेष्ट बैंकको खराब कर्जा सबैभन्दा कम ०.४९ छ भने सबैभन्दा धेरै एनआइसी एसिया बैंकको १५.५५ प्रतिशत छ।
अघिल्लो वर्षको तुलनामा बैंकहरुको पुँजीकोष अनुपात सुधार भएको छ। कर्जा नोक्सानी कम हुँदा बैंकहरुको पुँजीकोष अनुपात सुधार हुन थालेको छ। अघिल्लो वर्ष वाणिज्य बैंकहरुको औसत प्राथमिक पुँजीकोष ९.७६ प्रतिशत रहेकोमा अहिले ९.९० प्रतिशत छ।
पुँजीकोष सुधार हुनु भनेको बैंकहरुको कर्जा लगानी स्पेस थप बलियो हुनु नै हो। अधिक तरलता हुँदा पनि पुँजीकोष दबाब हुँदा बैंकहरुले कर्जा लगानी बढाउन सक्दैनन। त्यसकारण पुँजीकोष जति धेरै हुन्छ बैंकहरुसँग लगानीको क्षेत्र पनि त्यति नै बढी फराकिलो हुन्छ।
| वाणिज्य बैंक | २०८२/८३ खराब कर्जा % | २०८१/८२ खराब कर्जा % | २०८२/८३ प्राथमिक पुँजीकोष अनुपात% | २०८२/८३ प्राथमिक पुँजीकोष अनुपात% | २०८२/८३ औसत बेसरेट% | २०८१/८२ औसत बेसरेट% |
| एनएमबि बैंक | ४.९१ | ४.११ | ९.९ | ९.०५ | ५.११ | ६.२२ |
| सानिमा बैंक | २.८७ | ३.०१ | १०.१७ | ९.८६ | ४.९१ | ६.१२ |
| सिद्धार्थ | ३.५३ | २.६२ | १०.८८ | ९.८७ | ५.०२ | ६.४२ |
| एभरेष्ट | ०.४९ | ०.३८ | ९.९८ | १०.४४ | ४.२५ | ५.३६ |
| नबिल | ४.२ | ४.४८ | ९.६८ | ९.३१ | ४.४४ | ५.८३ |
| ग्लोबल | ४.९६ | ४.८६ | १०.०४ | १०.३४ | ४.७५ | ५.७६ |
| कृषि | ४.०७ | ३.४४ | ११.३५ | ११.९२ | ४.५६ | ५.८७ |
| नेपाल एसबिआई | २.९२ | ३.३५ | ९.३७ | ९.७६ | ५.२१ | ६.२९ |
| कुमारी | ७.४६ | ६.९५ | ९.९२ | ८.५१ | ५.०८ | ६.४४ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | ३.९५ | ३.७९ | ९.१९ | ८.९८ | ४.२ | ४.७८ |
| प्रभु | १५.५५ | ७.०१ | ८.१७ | ८.८३ | ४.९९ | ६.६७ |
| प्राइम | ६.६९ | ५.८१ | ९.८८ | ९.९८ | ४.९५ | ६.४९ |
| माछापुच्छ्रे | ३.९८ | ३.९६ | ८.६ | ९.२७ | ५.०४ | ६.३ |
| हिमालयन | ७.९६ | ७.९७ | ८.१९ | ७.६९ | ५.३१ | ६.६३ |
| सिटिजन्स | ५.८८ | ४.८९ | ९.२३ | ८.९५ | ५.०४ | ६.२५ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | २.०३ | १.४१ | १६.६८ | १५.७६ | ४.४२ | ४.९६ |
| एनआइसी एसिया | ९.२६ | ८.७४ | ६.२७ | ६.८७ | ५.८३ | ७.०५ |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट | ८.६६ | ६.३५ | ९.४६ | १०.४३ | ४.६४ | ५.७८ |
| लक्ष्मी सनराइज | ५.२३ | ४.३५ | ९.९ | १०.११ | ५.०५ | ६.५ |
| नेपाल बैंक | ४.१८ | ४.५६ | ११.२७ | ९.४१ | ४.४५ | ५.५८ |
| औसत | ५.४३ | ४.६० | ९.९० | ९.७६ | ४.८६ | ६.०६ |
कर्जा लगानी अपेक्षाजनक नहुँदा पछिल्लो २/३ वर्षदेखि बैंकहरुले घटाउदै आइरहेको निक्षेपको ब्याजदरले लागत कम भई बेसरेट घट्दा कर्जा सस्तिदै आइरहेको छ। बैंकहरुको औसत बेसरेट ५ प्रतिशत तल आएको छ। यसले कर्जाको ब्याजदर घटिरहेको संकेत गर्छ।
कर्जा नोक्सानी घटेर नाफा बढ्दा अधिकांश बैंकहरुको वितरणयोग्य नाफा सकारात्मक भई लाभांश क्षमता समेत बढेको छ।
गत वर्ष १६ वटा बैंकको लाभांश दिन सक्ने क्षमता देखिएको छ। बैंकहरुको न्यूनतम ३.०२ देखि अधिकतम ३८.३२ प्रतिशतसम्म लाभांश क्षमता देखिएको छ।
सबैभन्दा धेरै लाभांश क्षमता एभरेष्ट बैंकको ३८.३ देखिएको छ भने सबैभन्दा कम कुमारी बैंकको ३.०२ प्रतिशत छ।
त्यसैगरी, नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा, एनआइसी एसिया, प्रभु र हिमालयन बैंकको वितरणयोग्य नाफा ऋणात्मक छ। जसकारण यी बैंकहरुको लाभांश क्षमता पनि ऋणात्मक देखिएको छ।
३ वटा बैंकको लाभांश क्षमता २० प्रतिशत माथि छ भने ५ बैंकको १० प्रतिशतदेखि २० प्रतिशतसम्म लाभांश क्षमता देखिएको छ। अघिल्लो वर्षको नाफाबाट गत वर्ष १३ वटा बैंकले सेयरधनीलाई लाभांश दिएका थिए। यो वर्ष भने १६ वटा बैंक लाभांश दिन सक्ने क्षमता बनाएका छन्।
‘ऋण असुली सुधार हुँदा त्यसले कर्जा नोक्सानी घटेर नाफा बढाएको छ। असुली सुधार हुँदा रेगुलेटरी रिजर्भको रुपमा छुट्याउनु पर्ने प्रावधान कम हुन्छन्,’ उनले भने,’जसले गर्दा वितरणयोग्य मुनाफा बढेपछि लाभांश क्षमता पनि बढेको हो।’
एनआइसी एसिया बैंकको वितरणयोग्य नाफा सबैभन्दा धेरै १४ अर्ब ८६ करोड रुपैयाँले ऋणात्मक छ। त्यसैगरी, प्रभु बैंकको ६ अर्ब ३१ करोड, नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा बैंकको ५ अर्ब ८ करोड र हिमालयन बैंकको वितरणयोग्य नाफा ९ अर्ब ८४ करोडले ऋणात्मक देखिएको छ।
| वाणिज्य बैंकहरु | २०८२/८२ वितरणयोग्य मुनाफा (रु.करोडमा) | लाभांश क्षमता |
| एनएमबि बैंक | १७५ | ९.०८ |
| सानिमा बैंक | २८३ | २०.८५ |
| सिद्धार्थ | ३८६ | २६.१५ |
| एभरेष्ट | ५२५ | ३८.३२ |
| नबिल | ५१६ | १९.१ |
| ग्लोबल | ४५८ | १२.०२ |
| कृषि | १२६ | ६.५४ |
| नेपाल एसबिआई | १२५ | ११.०४ |
| कुमारी | ७९ | ३.०२ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | १०७ | ६.८९ |
| प्रभु | -६३१ | ० |
| प्राइम | १९० | ९.१ |
| माछापुच्छ्रे | ९८ | ७.५१ |
| हिमालयन | -९८४ | ० |
| सिटिजन्स | ५२ | ३.३७ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | १.९१ | १९.०४ |
| एनआइसी एसिया | -१४८६ | ० |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट | -५०८ | ० |
| लक्ष्मी सनराइज | १८१ | ६.७९ |
| नेपाल बैंक | २३२ | १५.८४ |
यसरी हेर्दा वाणिज्य बैंकहरुको नाफा बढे पनि बैंकिङ क्षेत्रको समग्र अवस्था पूर्णरूपमा सुधारिएको मान्न सकिने अवस्था छैन। कर्जा असुलीमा केही सुधार, प्रोभिजनिङमा कमी र ब्याज आम्दानीमा भएको वृद्धिले नाफा बढाउन सहयोग गरे पनि खराब कर्जा बढ्नु चुनौतीकै रूपमा देखिएको छ।
अर्कोतर्फ, पुँजीकोषमा सुधार र घट्दो बेसरेटले आगामी दिनमा कर्जा विस्तारको सम्भावना बढाएको छ। कर्जाको माग बढाउन सके बैंकहरुको आम्दानी थप विस्तार हुन सक्छ। अहिलेको अवस्थामा बैंकहरुले नाफा बढाउनुका साथै खराब कर्जा नियन्त्रण, कर्जा विस्तार र गुणस्तरीय लगानीमा ध्यान दिनुपर्ने देखिन्छ। यसले मात्र बैंकिङ क्षेत्रको सुधारलाई दिगो बनाउन सक्नेछ।










