काठमाडौं। वाणिज्य बैंकहरुले गत आर्थिक वर्ष ३ खर्ब १९ अर्ब रुपैयाँले ऋण बढाएका छन्। राष्ट्र बैंकले १२ प्रतिशतले ऋण बिस्तारको लक्ष्य राख्दै ५ खर्ब ९७ अर्ब रुपैयाँ वाणिज्य बैंकहरुबाट मात्र जाने प्रक्षेपण गरेको थियो।
त्यसको ठिक विपरीत ६ प्रतिशत आसपास अर्थात ३ खर्ब १५ अर्ब रुपैयाँ मात्र ऋण बिस्तार भएको हो। उच्च तरलता, न्यून ब्याजदरका बाबजुत बैंकहरुबाट ऋणको माग हुन सकेन। कतिपय अवस्थामा बैंकहरुलाई निर्देशित क्षेत्रमा तोकिएको ऋण पुर्याउनसमेत गाह्रो भएको छ।

गत आर्थिक वर्ष तीन वटा बैंकले ऋण घटाएका छन्। एनआएसी एसिया बैंकले २८ अर्ब ४१ करोड रुपैयाँ घटाएको छ। बैंकलाई पुँजीगत सबल बनाउनु पर्ने दबाब थियो। त्यही भएर नयाँ व्यवस्थापन आएपछि ऋण लगानीमा अंकुश लगाइएको थियो।
| बैंक | वर्ष दिनमा बढेको ऋण (रु अर्बमा) | कुल ऋण (रु अर्बमा) |
| नबिल | 54.29 | 487.98 |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | 37.81 | 346.72 |
| ग्लोबल आइएमई | 36.21 | 476.84 |
| लक्ष्मी सनराइज | 30.34 | 320.46 |
| नेपाल | 25.61 | 261.73 |
| एनएमबि | 24.66 | 267.96 |
| माछापुच्छ्रे | 24.21 | 171.29 |
| एभरेष्ट | 23.99 | 247.65 |
| सिद्धार्थ | 22.58 | 248.15 |
| कृषि विकास | 21.47 | 245.8 |
| सानिमा | 20.83 | 206.57 |
| प्राइम | 19.65 | 244.66 |
| नेपाल एसबीआइ | 10.26 | 153.11 |
| कुमारी | 10.08 | 302.39 |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | 3.75 | 360.32 |
| हिमालयन | 2.25 | 256.58 |
| सिटिजन्स | 2.17 | 177.33 |
| प्रभु | -8.98 | 232.19 |
| स्ट्यान्डर्ड चार्टर्ड | -17.64 | 70.82 |
| एनआइसी एसिया | -28.41 | 211.13 |
यसपछि स्ट्यान्डर्ड चार्टर्ड बैंकको पनि ऋण घटेको छ। बैंकको ऋण १७ अर्ब ६४ करोड रुपैयाँ घटेको हो। प्रभु बैंकको पनि ९ अर्ब रुपैयाँले ऋण घटेको छ।
गत आर्थिक वर्ष सर्वाधिक ऋण नबिल बैंकले बढाएको छ। बैंक एक्लैले ५४ अर्बभन्दा बढी ऋण वृद्धि गरेको हो। गत आर्थिक वर्ष १७ वटा वाणिज्य बैंकले बढाएकोमा १७ प्रतिशतभन्दा बढी हिस्सा नबिल एक्लैको छ। यसपछि राष्ट्रिय वाणिज्य बैंकले ३८ अर्ब र ग्लोबल आइएमई बैंकले ३६ अर्बले ऋण बढाएका छन्।
लक्ष्मी सनराइजले ३० अर्बले ऋण बिस्तार गरेको छ। नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा, हिमालयन र सिटिजन्स बैंकले ५ अर्बभन्दा कमले मात्र ऋण बिस्तार गरेका छन्।
नेपाल बैंक, एनएमबि बैंक, माछापुच्छ्रे, एभरेष्ट जस्ता बैंकहरुले २० अर्बमाथि ऋण बढाएका छन्।
| बैंक | गत वर्ष बढेको निक्षेप (रु अर्बमा) | कुल निक्षेप (रु अर्बमा) |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | 187.65 | 681.63 |
| ग्लोबल आइएमई | 125.39 | 700.44 |
| नेपाल | 82.51 | 416.38 |
| नबिल | 69.64 | 601.88 |
| कृषि विकास | 58.05 | 351.78 |
| लक्ष्मी सनराइज | 56.98 | 428.76 |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | 52.87 | 529.16 |
| सिद्धार्थ | 48.09 | 331.5 |
| हिमालयन | 43.62 | 356.68 |
| माछापुच्छ्रे | 36.25 | 222.1 |
| एनएमबि | 34.31 | 317.97 |
| कुमारी | 33.1 | 412.72 |
| सानिमा | 24.45 | 249.93 |
| स्ट्यान्डर्ड चार्टर्ड | 22.58 | 149.99 |
| एनआइसी एसिया | 21.23 | 345.72 |
| सिटिजन्स | 19.74 | 233.82 |
| एभरेष्ट | 17.23 | 318.37 |
| प्राइम | 15.35 | 283.4 |
| नेपाल एसबीआइ | 13.24 | 212.75 |
| प्रभु | 5.14 | 353.23 |
निक्षेप संकलन भने अत्याधि वृद्धि भएको छ। वाणिज्य बैंकहरुले एक वर्षमा ९ खर्ब ६७ अर्बले निक्षेप बढाएका छन्, जुन अघिल्लो वर्षभन्दा १५ प्रतिशत बढी हो।
उच्च दरले बढेको निक्षेप र न्यून दरले बढेको ऋणका कारण कर्जा-निक्षेप अनुपात (सीडी रेसियो) ७१ प्रतिशतमा झरेको छ। जबकि यो ९० प्रतिशतसम्म पुग्दा नियामकीय दायराभित्र हुन्छ।
सर्वाधिक निक्षेप वृद्धि गर्नेमा राष्ट्रिय वाणिज्य बैंक छ। यो बैंक एक्लैले एक खर्ब ८७ अर्ब रुपैयाँ निक्षेप बढाएको छ। यसपछि ग्लोबल आइएमई बैंकको निक्षेप एक खर्ब २५ अर्बले बढेको छ।
निक्षेप नेपाल बैंकको साढे ८२ अर्ब र नबिल बैंकको करिब ७० अर्बले बढेको छ। सबैभन्दा कम वृद्धि प्रभु बैंकको छ। यो बैंकको निक्षेप ५ अर्बले बढेको छ।










