काठमाडौं। केही वर्ष निरन्तर ओरालो लागेको वाणिज्य बैंकहरूको रिटर्न अन इक्विटी (आरओई)मा सुधार आएको छ। दोहोरो अंकबाट निरन्तर घट्दै ७.४२ प्रतिशतमा झरेको बैंकहरुको आरओई गत आर्थिक वर्ष बढेर ९.२४ प्रतिशत पुगेको छ।
आर्थिक वर्ष २०८१/८२ मा ७.४२ प्रतिशतमा झरेको बैंकहरुको आरओई २०८२/८३ मा ९.२४ प्रतिशत पुगेको हो। आर्थिक वर्ष २०७८/७९ वाणिज्य बैंकहरुको आरओई १२.१४ थियो। त्यसपछिका वर्षमा लगातार ओरालो लागेको थियो। आर्थिक वर्ष २०७९/८० मा १०.०२ प्रतिशत, २०८०/८१ मा ८.२४ प्रतिशत र २०८१/८२ मा ७.४२ प्रतिशत झरेको थियो।
आरओई बढ्नुले सेयरधनीको लगानीमा प्राप्त हुने लाभांश क्षमता बलियो हुनुलाई जनाउँछ।
प्रोभिजनिङको भार कम हुनु र लागत घट्नुले बैंकहरुको नाफा बढेर आरओई सुधार भएको बैंकरहरुको भनाइ छ।
नेपाल बैंकर्स संघका उपाध्यक्ष एवं ग्लोबल आइएमई बैंकका प्रमुख कार्यकारी अधिकृत (सीइओ) सुरेन्द्र रेग्मीका अनुसार खराब कर्जाबापत अघिल्ला वर्षहरूमा ठूलो रकम नोक्सानी व्यवस्था (प्रोभिजनिङ)मा छुट्याइसकेकाले थप भार कम हुँदा आरओईमा सुधा देखिएको हो।
‘पहिले नै पर्याप्त प्रोभिजनिङ भइसकेकाले यसपालि थप छुट्याउनु परेन,’ सीइओ रेग्मीले भने, ‘सँगै लागत (कष्ट अफ फण्ड) कम हुँदा खर्च घट्न गई नाफा वृद्धिमा मद्दत पुगेको हो।’
कुन बैंकको आरओई कति ?
| क्र.सं. | वाणिज्य बैंक | २०८१/८२ आरओई | २०८२/८३ आरओई | परिवर्तन (प्रतिशतमा) |
| १ | कृषि विकास | १०.२७% | ७.८९% | -२.३८% |
| २ | सिटिजन्स | ५.७८% | ८.७७% | २.९९% |
| ३ | एभरेष्ट | १३.१९% | १५.१०% | १.९१% |
| ४ | ग्लोबल आइएमई | ७.९३% | ९.१३% | १.२०% |
| ५ | हिमालयन | ०.३५% | ३.८३% | ३.४८% |
| ६ | कुमारी | ४.९०% | १६.४९% | ११.५९% |
| ७ | लक्ष्मी सनराइज | ९.४६% | ६.७२% | -२.७४% |
| ८ | माछापुच्छ्रे | ९.९६% | १०.३६% | ०.४०% |
| ९ | नबिल | ९.७७% | ११.७६% | १.९९% |
| १० | नेपाल | ८.४०% | ११.२७% | २.८७% |
| ११ | नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | ७.२०% | ४.१५% | -३.०५% |
| १२ | नेपाल एसबिआई | ८.८१% | ९.५९% | ०.७८% |
| १३ | एनआइसी एसिया | -१४.०३% | ०.७१% | १४.७४% |
| १४ | एनएमबि | ९.३४% | ११.५८% | २.२४% |
| १५ | प्रभु | २.६०% | -०.७१% | -३.३१% |
| १६ | प्राइम | ९.७३% | ११.८०% | २.०७% |
| १७ | राष्ट्रिय वाणिज्य | ७.३९% | ८.४२% | १.०३% |
| १८ | सानिमा | ११.७०% | १४.३९% | २.६९% |
| १९ | सिद्धार्थ | ११.४१% | १०.६२% | -०.७९% |
| २० | स्टान्डर्ड चार्टर्ड | १४.२८% | १२.८५% | -१.४३% |
| औसत | ७.४२% | ९.२४% | १.८१% |
१४ बैंकको आरओई सुधार हुँदा ६ वटाको भने खुम्चिएको छ।
पछिल्लो एक वर्षमा एनआइसी एसिया बैंकको आरओई १४.७४ प्रतिशतले वृद्धि भएको छ। त्यसैगरी, कुमारी बैंकको ११.५९ प्रतिशत, हिमालयन बैंकको ३.४८ प्रतिशत र नेपाल बैंकको आरओई २.८७ प्रतिशतले वृद्धि भएको छ।
सिटिजन्स बैंकको २.९९ प्रतिशत, एनएमबि २.२४ प्रतिशत र सानिमा २.६९ प्रतिशतले वृद्धि भएको छ।
तर कृषि विकास बैंकको आरओई २.३८ प्रतिशत, नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा बैंकको ३.०५ प्रतिशत, लक्ष्मी सनराइज बैंकको २.७४ प्रतिशत, प्रभु बैंकको ३.३१ प्रतिशत, सिद्धार्थको ०.७९ प्रतिशत र स्टान्डर्ड चार्टर्ड बैंकको आरओई १.४३ प्रतिशतले खुम्चिएको छ।
२०८३ असार मसान्तसम्म कुमारी बैंकको आरओई सबैभन्दा धेरै १६.४९ प्रतिशत छ। त्यस्तै, एभरेष्ट बैंकको १५.१० प्रतिशत, सानिमा बैंकको १४.३९ प्रतिशत र स्टान्डर्ड चार्टर्ड बैंकको १२.८५ प्रतिशत छ।
प्रभु बैंकको वित्तीय अवस्था भने कमजोर देखिएको छ। अघिल्लो वर्ष २.६० प्रतिशत रहेको प्रभुको आरओई गत असार मसान्तसम्म आइपुग्दा ऋणात्मक बनेको छ।
कर्जाको माग सुस्त रहे पनि लागत घटेकाले नाफा सुरक्षित भएको अर्का एक सीइओले बताए। उनका अनुसार आम्दानी सामान्य रहे पनि घट्दो कष्ट अफ फण्डले आरओई सुधारिएको हो।
‘हाम्रो खर्च घटेको छ। विगतमा ऋण असुली प्रभावित हुँदै जाँदा धेरै नै कर्जा नोक्सानी गरिसकेका छौं,’ उनले भने, ‘व्यवसाय ब्यालेन्स गरेर लैजान सकियो भने नाफासँगै रिटर्न एण्ड इक्विटी पनि थप राम्रो हुन्छ।’
बैंकहरुको पछिल्लो पाँच वर्षको आरओई
| क्र.स | वाणिज्य बैंक | आर्थिक वर्ष २०७८/७९ | आर्थिक वर्ष २०७९/८० | आर्थिक वर्ष २०८०/८१ | आर्थिक वर्ष २०८१/८२ | आर्थिक वर्ष २०८२/८३ (अनअडिटेड) |
| १ | कृषि विकास | ७.८२% | ४.०८% | ८.३७% | १०.२७% | ७.८९% |
| २ | सिटिजन्स | १०.२१% | ९.७६% | ६.५२% | ५.७८% | ८.७७% |
| ३ | एभरेष्ट | ११.७६% | १५.२८% | १५.३७% | १३.१९% | १५.१०% |
| ४ | ग्लोबल आइएमई | १२.६२% | १२.७९% | ११.१०% | ७.९३% | ९.१३% |
| ५ | हिमालयन | ११.८९% | ४.६०% | ३.५०% | ०.३५% | ३.८३% |
| ६ | कुमारी | १३.१४% | १.४९% | ०.०१% | ४.९०% | १६.४९% |
| ७ | लक्ष्मी सनराइज | १०.३९% | ६.३६% | ७.७७% | ९.४६% | ६.७२% |
| ८ | माछापुच्छ्रे | ११.६४% | १०.६१% | ६.५०% | ९.९६% | १०.३६% |
| ९ | नबिल | ९.७८% | १२.६८% | ११.८१% | ९.७७% | ११.७६% |
| १० | नेपाल | ८.२४% | १०.३९% | ०.०८% | ८.४०% | ११.२७% |
| ११ | नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | १२.६१% | ६.६९% | ७.३३% | ७.२०% | ४.१५% |
| १२ | नेपाल एसबिआई | ९.५७% | १२.०७% | ११.४६% | ८.८१% | ९.५९% |
| १३ | एनआइसी एसिया | १८.४३% | १७.८२% | २.३८% | -१४.०३% | ०.७१% |
| १४ | एनएमबि | १२.९५% | १२.७८% | ८.४०% | ९.३४% | ११.५८% |
| १५ | प्रभु | ११.२३% | ०.९०% | १.५९% | २.६०% | -०.७१% |
| १६ | प्राइम | १३.३६% | ३.७८% | १२.९२% | ९.७३% | ११.८०% |
| १७ | राष्ट्रिय वाणिज्य | १४.९७% | ७.६३% | ५.३५% | ७.३९% | ८.४२% |
| १८ | सानिमा | १४.१३% | १५.५४% | १२.९४% | ११.७०% | १४.३९% |
| १९ | सिद्धार्थ | १३.८२% | १४.३०% | १२.३३% | ११.४१% | १०.६२% |
| २० | स्टान्डर्ड चार्टर्ड | १४.२१% | २०.७८% | १८.९९% | १४.२८% | १२.८५% |
| औसत | १२.१४ | १०.०२ | ८.२४ | ७.४२ | ९.२४ |








