काठमाडौं। चालु आर्थिक वर्ष पहिलो त्रैमासमा वाणिज्य बैंकहरुले खुद नाफा ४५.६० प्रतिशतले नाफा बढाएका छन्।
वाणिज्य बैंकहरुले नाफा तीन महिनामा १९ अर्ब १४ करोड ५३ लाख रुपैयाँ कमाएको देखाए पनि खराब कर्जा वृद्धि भएको छ भने ब्याज आम्दानी १ प्रतिशत हाराहारी मात्रै बढेको छ।
पोहोर पहिलो त्रैमाससम्मको तुलनामा अहिले बैंकहरुको औसत खराब कर्जा ०.७९ प्रतिशत विन्दुले उकालो लागेको छ।
नेपाल बैंकका प्रमुख कार्यकारी अधिकृत (सीइओ) तिलकराज पाण्डेय पहिलो त्रैमासमा बाढी पहिरोले ठूलो क्षति भएपछि रिकभरीमा प्रेसर नगर्दा खराब कर्जा केही बढेको बताउँछन्।
‘रसुवा बाढीले गर्दा भौतिक र मानवीय क्षति भयो। त्यसको असर असुलीमा पर्यो,’ उनले भने, ‘यस्तो बेलामा हामीले पनि असुलीको प्रेसर गरेनौं। जसले गर्दा खराब कर्जा केही बढ्न पुगेको छ।’
गत असारको तुलनामा असोज मसान्तमा आइपुग्दा १३ वटा बैंकको खराब कर्जा बढेको छ। कुमारी बैंकको खराब कर्जा सबैभन्दा धेरै १.२६ प्रतिशत विन्दुले वृद्धि भएको छ।
गत असार मसान्तसम्म कुमारी बैंकको खराब कर्जा ७.४६ प्रतिशत रहेकामा असोज मसान्तसम्म आइपुग्दा ८.७२ प्रतिशत पुगेको छ।
खराब कर्जा नेपाल बैंकको ०.४३, नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगाको ०.२१ प्रतिशत, नेपाल एसबिआईको ०.२७ र हिमालयन बैंकको ०.०२ प्रतिशत विन्दुले बढेको छ।
७ वटा बैंकले भने खराब कर्जा घटाएका छन्। नबिल, स्टान्डर्ड चार्टर्ड, माछापुच्छ्रे, ग्लोबल आइएमई, प्रभु, सानिमा र राष्ट्रिय वाणिज्य बैंकले खराब कर्जा घटाएका हुन्।
कुन बैंकको खराब कर्जा कति?
| वाणिज्य बैंक | खराब कर्जा २०८२/८३ असोजसम्म (प्रतिशतमा) | खराब कर्जा २०८२/८३ असारसम्म (प्रतिशतमा) | खराब कर्जा २०८३/८४ असोजसम्म (प्रतिशतमा) |
| नेपाल | ५.४९ | ४.१८ | ४.६१ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | ३.८३ | ३.९५ | ३.८९ |
| नबिल | ४.३१ | ४.२ | ४.०६ |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | ६.६३ | ८.६६ | ८.८७ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | १.७१ | २.०३ | १.८३ |
| हिमालयन | ७.३९ | ७.९६ | ७.९८ |
| नेपाल एसबिआई | ३.०१ | २.९२ | ३.१९ |
| एभरेष्ट | ०.७४ | ०.४९ | ०.५ |
| एनआईसी एसिया | ६.९९ | ९.२६ | ९.८१ |
| माछापुच्छ्रे | ४.१३ | ३.९८ | ३.९७ |
| कुमारी | ६.९८ | ७.४६ | ८.७२ |
| लक्ष्मी सनराइज | ५.४२ | ५.२३ | ५.५८ |
| सिद्धार्थ | ३.८ | ३.५३ | ३.७ |
| कृषि | ४.७८ | ४.०७ | ४.७९ |
| ग्लोबल आइएमई | ४.९८ | ४.९६ | ४.७९ |
| सिटिजन्स | ६.८४ | ५.८८ | ६.८ |
| प्राइम | ५.८६ | ६.६९ | ७.१५ |
| एनएमबि | ४.५८ | ४.९१ | ४.९२ |
| प्रभु | ५.७८ | १५.५५ | १४.८ |
| सानिमा | ३.९१ | २.८७ | २.८६ |
| औसत | ४.८५८ | ५.४३९ | ५.६४१ |
खराब कर्जा वृद्धि भएको अवस्थामा नाफामा देखिएको बढोत्तरी टिकाउ हुँदैन। बैंकहरुले नाफा धेरै देखाउन प्रोभिजनिङ आधा घटाएका छन्। गत वर्षसम्मको तुलनामा यस वर्ष असोजमा आइपुग्दा बैंकहरूले प्रोभिजनिङ (सम्भावित जोखिम व्यवस्थापन रकम)आधामा झारेका हुन्।
चालु आर्थिक वर्ष पहिलो त्रैमाससम्म बैंकहरुले १० अर्ब ९९ करोड रुपैयाँ प्रोभिजनिङ गरेका छन्। पोहोर सोही अवधिमा यस्तो रकम २० अर्ब ४ करोड थियो। एभरेष्ट बैंकले प्रोभिजनिङ राइट ब्याक गरेको छ। अन्य सबै बैंकको यस्तो नोक्सानी घटेको छ।
एनएमबि बैंकका सीइओ गोविन्द घिमिरे प्रोभिजनिङ रकम आधा घटेका कारण त्यसले नाफा बढाउन सहयोग गरेको बताउँछन्।
‘पछिल्लो समय असुली प्रभावित बन्दै जाँदा हामीले प्रोभिजनिङमा राम्रो रकम छुट्याउनु परेको थियो। अहिले लगानी सुस्त भएका कारण प्रोभजनिङ खासै बढ्ने भएन,’ उनले भने, ‘असुलीमा थोरै सुधार हुँदा प्रोभिजनिङ घट्ने र नाफा राम्रो हुने हुन्छ।’
कुन बैंकको प्रोभिजनिङ रकम कति?
| बैंक | प्रोभिजनिङ रकम २०८३/८४ असोजसम्म (रु. करोडमा) | प्रोभिजनिङ रकम २०८२/८३ असोजसम्म (रु. करोडमा) | फरक (प्रतिशतमा) |
| नेपाल | ५४ | ६४ | -१५.६३ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | ३५ | ९७ | -६३.९२ |
| नबिल | १६ | ६४ | -७५ |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट मेगा | १०९ | २८० | -६१.०७ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | -६ | १७ | -१३५.२९ |
| हिमालयन | ३५ | ५७ | -३८.६ |
| नेपाल एसबिआई | १८ | २८ | -३५.७१ |
| एभरेष्ट | २३ | ४२ | -४५.२४ |
| एनआईसी एसिया | ९२ | ११८ | -२२.०३ |
| माछापुच्छ्रे | २१ | ४६ | -५४.३५ |
| कुमारी | ४५ | १२६ | -६४.२९ |
| लक्ष्मी सनराइज | ११९ | १९३ | -३८.३४ |
| सिद्धार्थ | ६७ | १३८ | -५१.४५ |
| कृषि | ११५ | १४६ | -२१.२३ |
| ग्लोबल आइएमई | ४८ | १०१ | -५२.४८ |
| सिटिजन्स | १०७ | १७३ | -३८.१५ |
| प्राइम | ६१ | ४८ | २७.०८ |
| एनएमबि | ५० | ७१ | -२९.५८ |
| प्रभु | ५८ | १०० | -४२ |
| सानिमा | ३३ | ९५ | -६५.२६ |
| जम्मा | १०९९.९९ | २००४ | -४५.११ |
पछिल्ला वर्षहरुमा कर्जा लगानी सुस्त हुँदा बैंकहरुको ब्याज आम्दानी थोरै बढेको छ। चालु आवको पहिलो त्रैमासमा बैंकहरुको ब्याज आम्दानी ०.९६ प्रतिशत बढेको छ। उनीहरुले पहिलो त्रैमासमा ४९ अर्ब ५७ करोड रुपैयाँ ब्याज आम्दानी गरेका हुन्।
बैंकहरुको आम्दानीको मुख्य स्रोत ब्याज आम्दानी हो। असुलीमा अपेक्षाजनक सुधार हुन नसकेको अवस्थामा लगानी सुस्त भइरहे त्यसको असर विस्तारै ब्यालेन्स सिटमा देखिनेछ।
कुन बैंकको ब्याज आम्दानी कति?
| वाणिज्य बैंक | ब्याज आम्दानी २०८३/८४ असोजसम्म (रु. करोडमा) | ब्याज आम्दानी २०८२/८३ असोजसम्म (रु. करोडमा) | फरक (प्रतिशतमा) |
| नेपाल | २४८ | २५६ | -३.१३ |
| राष्ट्रिय वाणिज्य | ४०१ | २९२ | ३७.३३ |
| नबिल | ४७३ | ३९० | २१.२८ |
| नेपाल इन्भेष्टमेन्ट | ३२७ | ३२४ | ०.९३ |
| स्टान्डर्ड चार्टर्ड | १०२ | १०७ | -४.६७ |
| हिमालयन | २१९ | २५० | -१२.४ |
| नेपाल एसबिआई | १२६ | १३१ | -३.८२ |
| एभरेष्ट | २३७ | २४० | -१.२५ |
| एनआईसी एसिया | १८८ | २२८ | -१७.५४ |
| माछापुच्छ्रे | १६८ | १४५ | १५.८६ |
| कुमारी | २०९ | २९१ | -२८.१८ |
| लक्ष्मी सनराइज | २७६ | २७१ | १.८५ |
| सिद्धार्थ | २३८ | २१६ | १०.१९ |
| कृषि | २३६ | २४५ | -३.६७ |
| ग्लोबल आइएमई | ४१९ | ४१३ | १.४५ |
| सिटिजन्स | १५४ | १६६ | -७.२३ |
| प्राइम | २६० | २४० | ८.३३ |
| एनएमबि | २५९ | २४८ | ४.४४ |
| प्रभु | २३३ | २८९ | -१९.३८ |
| सानिमा | १८४ | १६८ | ९.५२ |
| जम्मा | ४९५७ | ४९१० | ०.९६ |