विराटनगर। वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघले एक महिनाअघि नेकपाका संयोजक पुष्पकमल दाहाल (प्रचण्ड)लाई कम्तीमा १ सय वटा उपभोग्य वस्तुको सूची बुझायो।
तयारी वस्तुको भन्सारदर नेपाल र भारतमा समान बनाउन सके देशको ढुकुटीमा पैसा जम्मा हुने र अवैध व्यापार पनि ठप्प हुने जिकिर गर्दै संघले प्रचण्डलाई सूची दिएको थियो।
प्रचण्डले त्यो सूची लिँदै आफूले संसद्मा उद्योगीका मुद्दा उठाउने प्रतिबद्धता जनाए। ‘म सरकारमा नभएकाले कार्यान्वयन गर्ने हैसियतमा छैन। तर, संसद्मा यो मुद्दा उठाउँछु,’ प्रचण्डले भनका थिए।
संघले राजनीतिज्ञहरुलाई सूची दिएको पहिलो पटक होइन। यसअघि तत्कालीन अर्थमन्त्री विष्णु पौडेललाई पनि संघले अत्यावश्यक सय वस्तुको सूची दिएर भन्सार दर समान बनाउन आग्रह गरेको थियो।
संघका उपाध्यक्ष मनोजकुमार दासले असमान भन्सार दरका कारण अवैध व्यापार फस्टाउँदा राज्यले पनि राजस्व गुमाइरहेकाले सय वस्तुको भन्सार दर समान राख्नका लागि पहल गरिरहेको बताए।
‘भारतको सीमावर्ती बजारमा कुनै वस्तु एक सयमा पाइन्छ भने छेउको नेपाली बजारमा १०५ रुपैयाँमा पाइनुपर्छ। नेपालले त्यसरी भन्सार महसुल निर्धारण गर्नुपर्छ। यहाँ महँगी चर्को महसुलले गर्दा भएको हो। त्यसमा रिभ्यु हुने हो भने सामान किन्न नेपाली नागरिक भारत जाँदैनन्। र, अवैध व्यापारको श्रृंखला पनि बन्द हुन्छ,’ उपाध्यक्ष दासले भने।
उनका अनुसार केही वर्षअघिसम्म कोकाकोलादेखि पेप्सीसम्म स्वदेशकै बिक्री हुने गर्थ्यो। तर, पछिल्लो समयमा सामान्य जम्बो कोकहरु पनि नेपालभन्दा भारतमा सस्तो हुन थालेपछि सीमाका नेपाली उतै किन्न जाने गरेका छन्।
‘हामीले भन्सार दर रिभ्यु नगर्ने हो भने यहाँका बहुराष्ट्रिय कम्पनी समेत सस्टेन गर्न सक्दैनन्। हामीले वीरगंजका उद्योगी व्यवसायीको मुद्दा हेरेका होइनौं। समग्र उद्योग र व्यवसायको समस्यालाई हेरेर सम्बोधन होस् भन्न चाहेका हौं,’ उनले भने, ‘हामीले दिएको सूचीका वस्तुको भन्सार दर समान बनाएर राजस्व असुली हेरौं। त्यसपछि कम भएमा फेरि पुरानै व्यवस्थामा गए हुन्छ।’
प्रजातन्त्र पुनर्स्थापनापछि बहुराष्ट्रिय कम्पनीले नेपालमा धमाधम प्लान्ट राखेकामा अहिले नआउनुको मुख्य कारण नै यहाँको राजस्व प्रणाली भएको उद्योगी व्यवसायीको बुझाइ छ।
‘डाबरले भारतको समेत बजार हेरेर यहाँ प्लान्ट लगाएको थियो। यहाँबाट रियल जुस र मह समेत भारत निकासी हुन्थ्यो। तर पछिल्लो समयमा नेपालमा भन्दा उत्पादन लागत भारतमा सस्तो छ। बरु विस्तारै नेपालको राजस्व प्रणालीले प्रतिस्पर्धा नै गर्न नसक्ने अवस्था निम्तिएको छ,’ दासले भने, ‘भएकै उद्योगलाई सर्भाइभ गर्न गाह्रो छ। त्यसैले नयाँ आउन सम्भव छैन।’

उनका अनुसार नेपालमा उत्पादन हुने वस्तुको कच्चा पदार्थमा भन्सार दर कम गरी यहाँ उत्पादन नहुने वस्तुको भन्सार दर भारतसँग समान बनाउनुपर्छ। संघले चिनी, चामल, गहुँको पिठो, लत्ताकपडादेखि जुसका वस्तुलाई भन्सार दर समान बनाउनुपर्ने अत्यावश्यक उपभोग्य वस्तुको सूचीमा राखेको छ।
चेम्बर र सीएनआईको धारणा यस्तो
दुई प्रमुख व्यावसायिक संगठन नेपाल चेम्बर अफ कमर्स र नेपाल उद्योग परिसंघको धारणा भने वीरगंजका व्यवसायीको भन्दा थोरै भिन्न छ।
चेम्बर र सीएनआई दुबै संस्थाको भनाइ छ- नेपालमा उत्पादन हुने वस्तुमा प्रयोग हुने कच्चा पदार्थको महसुल १ देखि ५ प्रतिशत बनाएर स्वदेशी उत्पादनको मूल्य भारतीय बजार बराबर बनाउनुपर्छ। तर, नेपालमा उत्पादन नहुने कपडा, ड्राई फ्रुट्स, दालदलहन लगायत वस्तुको महसुल १ देखि ५ प्रतिशत मात्र बनाएर भारतीय बजारको मूल्य बराबर बनाउनु पर्छ। ताकि यहाँका उद्योग पनि नमरून् र उपभोक्ताले पनि सस्तो पाऊन्।
‘चेम्बरले बारम्बार यही कुरा उठाउँदै आएको छ कि महसुलको दर उच्च बनाउँदैमा राजस्ववृद्धि हुनसक्तैन बरु ग्रे मार्केट मौलाउँछ। त्यसैले कतै तयारी वस्तुको र कतै कच्चा पदार्थको महसुलमा पुनःसंरचना गर्नैपर्छ। यसको व्यापक पुनरवलोकन गरेर उपभोग्य वस्तु सस्तो बनाउनु पर्छ,’ चेम्बरका वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक मल्होत्राले भने।

सीएनआई कोशीका अध्यक्ष पवनकुमार शारडाले बजेट भाषणमा अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्लेले ३६० वस्तुमा अन्तःशुल्क हटाएको घोषणा गर्दा आफूसहितका व्यवसायीले उपभोग्य वस्तु अब सस्तो हुने भयो भनेर ताली बजाएको स्मरण गरे।
‘तर बजेट आएको राति ८ बजे जब हामीले आर्थिक विधेयक पढ्न थाल्यौँ अन्तःशुल्क हटाएको घोषणा त भ्रम छरेको मात्र रहेछ। जुन जुन वस्तुमा अन्तःशुल्क हटाइएको छ ती वस्तुमा आन्तरिक उत्पादन प्रवर्धन संरक्षण शुल्क भन्ने अर्को कर महसुल थपिएको रहेछ,’ शारडाले भने।
शारडाले नेपालले निर्यातमूलक औद्योगिक कच्चा पदार्थमा समेत चर्को अन्तःशुल्क लगाएर बदनामी कमाइरहेको आरोप लगाउँदै दैनिक उपभोगका वस्तु पनि चर्को महसुलको मारमा परेर स्वदेशमा महँगो भएको जिकिर गरे।
‘हाम्रो धारणा स्पष्ट छ कि नेपालमा उत्पादन हुने वस्तुका कच्चा पदार्थ र उत्पादन नहुने वस्तुको आयात महसुल न्यूनतम हुनुपर्छ। अनि मात्र जनताले सस्तोमा वस्तु पाउन सक्छन् र कानुनी आयात वृद्धि भएर राजस्वमा पनि योगदान हुन्छ,’ उनले भने।
वस्तु तथा महसुलदर
| क्र.सं. | वस्तु | महसुलदर (%) |
| १ | चामल | ९ |
| २ | केराउ | ३० |
| ३ | चना | १० |
| ४ | मास | १० |
| ५ | जिरा | १८.६५ |
| ६ | धनियाँ | १८.६५ |
| ७ | धुलो खुर्सानी | २५.७७ |
| ८ | सर्ट | ३५.६ |
| ९ | टी सर्ट | ३५.६ |
| १० | मोजा | ३५.६ |
| ११ | ज्याकेट | ३५.६ |
| १२ | ब्रेसियर | ३५.६ |
| १३ | जुत्ता | ५७.१८ |
| १४ | ज्वानो | १४.४५ |
| १५ | काजु | २९.३५ |
| १६ | किसमिस | १९.७५ |
| १७ | अन्जिर | २४.५८ |
| १८ | अलमोन्ड | २४.३ |
| १९ | चिसो पेय | ५४.२४ |
| २० | साइकल | १८.६५ |
| २१ | बदाम | १० |
| २२ | तोरीको तेल | २९.९५ |
| २३ | स्याउ | १० |
| २४ | आँप | १४.४५ |
| २५ | अम्बा | १४.४५ |
| २६ | कर्न फ्लेक्स | ३३.३२ |
| २७ | राजमा | १० |
| २८ | चिज | २९.९५ |
| २९ | बटर | ६१.५९ |
| ३० | चिनी | २९.९५ |
| ३१ | आलु | ९ |
| ३२ | प्याज | २४.३ |
| ३३ | लसुन | २४.३ |
| ३४ | गोलभेंडा | १० |
| ३५ | मरिच | ५५.९४ |
| ३६ | तोरी | २४.३ |
| ३७ | चियापत्ती | ६१.५९ |
| ३८ | कफी | ६१.५९ |
| ३९ | दूध पाउडर | ३५.६ |
| ४० | पाउरोटी र अन्य ब्रेड | ७९.२२ |
| ४१ | बिस्कुट | ७९.२२ |
| ४२ | चाउचाउ | ४६.९ (प्रति किलो रु. ३५ थप) |
| ४३ | अन्डा | १० |
| ४४ | कुखुराको मासु | ९ |
| ४५ | माछा | ९ |
| ४६ | साबुन | ५४.२५ |
| ४७ | डिटर्जेन्ट पाउडर | ५४.२५ |
| ४८ | टिस्यु पेपर | ४२.३८ |
| ४९ | फिनाइल | १८.६५ |
| ५० | काइँयो | २१.१९ |
| ५१ | कपालमा लगाउने तेल | ४९.४४ |
| ५२ | पर्फ्युम | ४९.४४ |
| ५३ | डियोडेरेन्ट | ४९.१६ |
| ५४ | तौलिया | २९.९५ |
| ५५ | तन्ना | २९.९५ |
| ५६ | कम्बल | २९.९५ |
| ५७ | छाता | ३९.३७ |
| ५८ | मोबाइल सेट | १८.६५ |
| ५९ | चार्जर | २९.९५ |
| ६० | इयरफोन | ३०.५२ |
| ६१ | ड्राईसेल ब्याट्री | ४६.९ |
| ६२ | बल्ब | ३५.६ |
| ६३ | कुचो | २१.१९ |
| ६४ | कैँची | २४.३ |
| ६५ | गुँद | २४.३ |
| ६६ | सलाई | ४६.९ |
| ६७ | लाइटर | ३५.६ |
| ६८ | मैनबत्ती | २१.१९ |
| ६९ | मच्छड भगाउने झोल | २३.७४ |
| ७० | मह | २३.१७ |
| ७१ | जाम | ४९.४४ |
| ७२ | नरिवल | २४.३ |
| ७३ | सुकुमेल | ३५.६ |